अपोलो 11 अंतरिक्ष मिशन

अपोलो 11 अंतरिक्ष मिशन (apolo 11 space mission)

चन्द्रमा पर सबसे पहले जाने वाले व्यक्ति एवं कुछ और रोचक बातें :-

चन्द्रमा पर सबसे पहले कदम रखने वाले व्यक्ति नील आर्मस्ट्रांग थे । इस मिशन का नाम अपोलो - 11 था। 20 जुलाई 1969 को अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग ने चन्द्र्मा पर पहला कदम रखा। ये एक बहुत ही  ऐतिहासिक पल था। यह मानव इतिहास की सबसे लंबी छलांग थी। लगभग 53 करोड़ लोगों ने इस ऐतिहासिक पल को लाइव देखा था। इस यात्रा में नील के साथ बज एल्ड्रिन भी थे जिन्होंने नील आर्मस्ट्रांग के बाद चन्द्रमा पर कदम रखा था। चांद पर चहलकदमी करते हुए नील ने कहा था की ये इंसान का एक छोटा सा कदम है और मानवता की लंबी छलांग है। वही बज एल्ड्रिन ने कहा - शानदार वीरानगी। वास्तव में यह एक ऐतिहासिक पल था।


इस मिशन में लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए थे ओर 12 लोग चांद पर पहुंचे थे।

कुछ और खास बातें:-

अपोलो के कुल 11 मिशन में 33 अंतरिक्ष यात्री गए थे, इनमे से 27 चांद पर पहुंचे। 24 ने चांद का चक्कर लगाया। लेकिन सिर्फ 12 को ही चांद की सतह पर कदम रखने का मौका मिला।
नासा का अनुमान है कि लगभग 4 लाख लोग अपोलो 11 मिशन से जुड़े हुए थे। इनमे चांद पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों से लेकर मिशन कंट्रोलर, ठेकेदार, कैटरर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, नर्से, डॉक्टर, गणितज्ञ और प्रोग्रामर थे। 

अपोलो मिशन पर बनी फ़िल्म:-

2016 में आई फ़िल्म हिडन फिगर्स अपोलो मिशन में शामिल महिलाओं पर बनी है। क्योंकि इस मिशन में महिलाओं की काफी भागीदारी थी। नासा ने डाटा प्रोसेसिंग ओर जटिल गणना के लिए अफ्रीकी - अमरीकी गणितज्ञ महिलाओं को मानव कंप्यूटर के तौर पर नियुक्त किया था।

जो चांद पर पहुंचे, उनकी जिंदगी में आये कुछ बदलाव

जो लोग चांद पर पहुंचे थे उनकी जिंदगी में कुछ बदलाव नज़र आये।
चांद पर 12 लोगो ने कदम रखा था उनमे से ज्यादातर को दिक्कतें झेलनी पड़ी।  बज एल्ड्रिन डिप्रेशन में चले गए थे।  ड्यूक के परिवार को उनसे तालमेल बैठाने में दिक्कत हुई। शादी टूटने की भी नोबत आ गयी थी जबकि जिनि सर्नन की तो शादी टूट ही गयी। और एड मिसेल रहस्यवादी हो गये।   
इन सबको कुछ परेशानी हुए थी।


इसरो का चन्द्रयान-2


इसरो का चन्द्रयान-2 अब 22 जुलाई को लांच होगा। पहले यह 15 जुलाई को लॉन्च होना था लेकिन कुछ तकनीकी खराबी आ गयी थी ओर लांच होने के 56 मिनट 24 सेकंड पहले लॉन्चिंग टाल दी गयी। यह चन्द्रयान निर्धारित तिथि  7 सितम्बर को  ही पहुंचेगा। क्योंकि पहले इसे पृथ्वी के 5 चक्कर लगाने थे अब यह 4 चक्कर ही लगायेगा।




वास्तव में वो एक ऐतिहासिक पल होता है जब लम्बे समय से चल रही कोशिश पूरी हो जाती है। वैसे ही यह भी एक ऐतिहासिक पल था। 




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