Kurukshetra city in india कुरुक्षेत्र की पूरी जानकारी

Kurukshetra city in india 

हरियाणा का कुरुक्षेत्र जिला पूरी जानकारी

कुरुक्षेत्र का इतिहास





कुरुक्षेत्र अतिप्राचीन तथा ऐतिहासिक नगर है। कुरुक्षेत्र जिला हरियाणा का एक अभिन्न अंग है। कुरुक्षेत्र महाभारत युद्ध एवं श्रीमदभागवतगीता का जन्म स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। हिन्दुओ के इस धार्मिक स्थल से तीर्थ यात्रा की शुरुआत की जाती है। यह भारतीय विचारधारा की जन्म स्थली तथा आर्य संस्कृति का प्रधान केंद्र है
इसी के तट पर महर्षि वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत की रचना की थी। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश यहाँ स्थित ज्योतिसर नामक स्थान पर दिया था। इसी के निकट एक कृष्ण - अर्जुन रथ तथा शंकराचार्य  के मंदिर का निर्माण कामकोटि पीठ के शंकराचार्य ने करवाया था। इस जिले में एक वाल्मीकि आश्रम है, जहाँ पर बाबा लक्ष्मण गिरी महाराज द्वारा जीवित समाधि ली गई थी। यहाँ पर सूर्यग्रहण के समय लाखों श्रद्धालु स्नान व धर्मानुष्ठान के लिए आते है। वृद्ध ओर अशक्त लोग यहाँ मुक्ति प्राप्त करने की आशा से आते है।
कहा जाता है कि महाभारत से पूर्व भी कुरुक्षेत्र में 10 राजाओं के बीच युद्ध हुआ था।





नामकरण 


राजा कुरु के नाम पर इस स्थान का नाम कुरुक्षेत्र पड़ा।
यह क्षेत्र सरस्वती व दृषद्वती नदियों के मध्य स्थित था। इस भूमि को विभिन्न अवधियों में उतरवेदी, ब्रह्मावेदी, धर्मक्षेत्र व कुरूक्षेत्र कहा गया।

कुरुक्षेत्र  को city of parks भी कहा जाता है। यहाँ प्रसिद्ध पार्क पुरुषोत्तम पार्क, हर्षवर्धन पार्क ओर तपोवन पार्क स्थित है।

पर्यटन स्थल

बिरला मन्दिर
कपाल मोचन
महाकाली मन्दिर 
360 तीर्थ
ब्रह्मसरोवर
ज्योतिसर 
कमली वाले बाबा का डेरा
पंचवटी
गीता भवन
चन्द्ररूप
कालेश्वर तीर्थ
प्राची कुबेर तीर्थ
नरकतरी कमोदा 





प्रमुख मन्दिर 

दुखभंजनेस्वर मन्दिर                     कुरुक्षेत्र
नारायण मंदिर                              कुरुक्षेत्र
लक्ष्मीनारायण मन्दिर                     कुरूक्षेत्र
सर्वेश्वर मन्दिर                              कुरुक्षेत्र
बिड़ला मन्दिर                             कुरुक्षेत्र
भद्रकाली(देवीकुप) मन्दिर            कुरुक्षेत्र
स्थानेस्वर महादेव ( शिव) मंदिर       कुरुक्षेत्र
अदिति का मंदिर                        अमीन गांव ( कुरुक्षेत्र)



प्रमुख मेले

सूर्यग्रहण स्नान 
पेहोवा का मेला
देवी का मेला
मारकण्डा का मेला
महावीर जयंती उत्सव
वैसाखी का मेला






कुरुक्षेत्र महोत्सव - यह महोत्सव दिसंबर मास में कुरुक्षेत्र शहर में आयोजित किया जाता है। यह महोत्सव श्रीमद भागवत गीता के प्रणयन की वर्षगांठ की स्मृति में मनाया जाता है। यहां शोलका गायन का आयोजन भी होता है।








प्रमुख स्थल


1) सर्वेश्वर महादेव मंदिर- यह प्रसिद्ध मंदिर बाबा श्रवणनाथ के द्वारा बनवाया गया था। इसे कुरुक्षेत्र के प्रमुख मंदिरों में एक माना जाता है।

2) कमलेश्वर तीर्थ - यह अतिप्राचीन धार्मिक स्थान है। यहाँ पाप नाशक लिंग की पूजा की प्रथा प्राचीन समय से की जा रही है।

3) पेहोवा - यह प्राचीन काल से ही तीर्थ यात्रा का केन्द्र है। करनाल गजेटियर इसके नाम की व्युत्पत्ति संस्कृत शब्द पृथुुुदक पृथु का तालाब से है जो राजा वेण का पुत्र था। यहाँ से प्राप्त 9वीं सदी के दो शिलालेखों से पता चलता है कि उस समय यह कन्नौज से राजा भोज ओर उसके पुत्र महेन्द्रपाल के शासन में सम्मिलित था। 



4) लाडवा - यह कुरुक्षेत्र से लगभग 20 किमी दूर कुरुक्षेत्र - यमुनानगर सड़क पर स्थित है। यह नगर भी सिक्खों के घरानों का था। इस नगर के पास एक सरोवर है जिसके किनारे पर एक देवी का मंदिर है जहाँ प्रतिवर्ष बड़ा भारी मेला लगता है।

सिक्खों के पहले युद्ध के पश्चात ही अंग्रेजों ने इसे अपने अधिकार में ले लिया था। कुरुक्षेत्र जिले की यह सबसे पुरानी नगरपालिका है, जिसकी स्थापना 1867 में कई गई थी।

5) शाहबाद मारकण्डा -यह नगर जीटी रोड पर कुरुक्षेत्र से 23 किमी की दूरी पर, मारकण्डा नदी के किनारे बसा हुआ है। सन 1192 में तरावड़ी की लड़ाई के पश्चात शहाबुद्दीन मुहम्मद गोरी के जनरल ने इस नगर की स्थापना की थी। 

यही महर्षि मार्कण्डेश्वर की तपस्या स्थली बाद में शाहबाद मारकण्डा के रूप में बसी। महर्षि मार्कण्डेश्वर का मंदिर आज भी मारकण्डा नदी के तट पर स्थित है।


6) थानेसर (स्थाण्वीश्वर) - बोद्ध तथा जैन साहित्य में जिस थूण तथा थूणा गाम का उल्लेख है वही आगे चलकर स्थाण्वीश्वर नगर कहलाया। यह श्रीकंठ जनपद की राजधानी थी। शक्तिशाली वर्धन वंस का उदय यहीं हुआ था, जिसमें दो प्रतापी शासकों  - प्रभाकर वर्धन ओर हर्षवर्धन के समय यह नगर गौरव की चरमसीमा पर पहुंचा था लेकिन हर्षवर्धन को तत्कालीन राजनेतिक परिस्थितियों के कारण अपनी राजधानी कन्नौज बनानी पड़ी।

थानेसर नगर का गौरवपूर्ण इतिहास हर्षचरित चीनी यात्री ह्वेनसांग के वृत्तांत ओर मुस्लिम के विवरण से ज्ञात होता है। बाणभट्ट के विवरण से पता चलता है कि हर घर मे शिव की पूजा की जाती थी।

7) कुरुक्षेत्र के श्रीकृष्ण संग्रहालय - सन 1987 में श्रीकृष्ण संग्रहालय की स्थापना कुरुक्षेत्र में कई गई। 1991 में यहाँ संग्रहालय अपने वर्तमान भव्य व दर्शनीय स्वरूप में बनकर तैयार हुआ।

8) कुरुक्षेत्र पेनोरमा एवं विज्ञान केंद्र - यहाँ एक विश्वस्तरीय पैनोरमा हैै जिसमें  महाभारत युद्ध के प्रत्येक एपिसोड को  वैज्ञानिक कारणों से सम्बंधित   किया गया है।

9) कल्पना चावला प्लेनिटेरियम - प्रथम भारतीय महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की स्मृति में निर्मित किया गया प्लेनिटेरियम।

10) अमीन - इसी स्थान पर   अदिति ने भगवान को  पुत्र के रूप में पाने के  लिये 10000 वर्ष तप किया।  कहा जाता है कि ग्राम का नामकरण अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु के नाम   पर  किया गया था जो   कालांतर में  अमीन हो गया।





कुरुक्षेत्र में अन्य



1  प्रथम तीर्थ स्थल

2  पेराकीट पिपली

3 नीलक्रांति कृष्णा डेम

4 महिला हॉकी एकेडमी

5  पिपली चिड़ियाघर

6  धर्म समाचार पत्   (  1943 )

7 नीलकंठ धाम

8  आकाशवाणी केन्द्र   ( 24 जुन 1991 )

9  शाहाबाद चिन्नी मील

10   बासमती चावल के लिए प्रशिद्ध

11   कुकुट रोग जाँच प्रयोगशाला

12    सन्निहित तीर्थ

13   पिली मिट्टी

14    मस्ज़िद ( निले पिले टाइलों के लिए प्रसिद्ध )

15   ब्लेक बक प्रजनन केन्द्र  ( पिपली )

16   मगरमच्छ प्रजनन केन्द्र   

17   सरस्वती वन्य जीव अभ्यारण्य

18    छिलछिला वन्य जीव अभ्यारण्य

19   जगजीत सिंह       ( गायक )






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